Shohrat par shayari, शोहरत पर शायरी -apnishayeri

Shohrat par shayari

 

Shohrat-shayari

दौलत शोहरत आनी जानी फिर इस पर इतराना क्या

पानी पर ये नाम लिखा हो ऐसा भी हो सकता है

- यूनुस ग़ाज़ी

अपने अफ़्साने की शोहरत उसे मंज़ूर न थी 

उस ने किरदार बदल कर मेरा क़िस्सा लिक्खा 

- शीन काफ़ निज़ाम

Shohrat par shayari in hindi 

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लुटा कर प्यार की दौलत खरीदे दर्द और आंसू,

मिली जो इश्क़ में हमको जरा वो जागीर तो देखो।

दौलत पर शायरी 

दौलत वालों को दौलत मंद कहो,

अमीर वो है जो ज़मीर रखता है।

बुजर्गौं की दुआएं शायरी 

दुआएं इकट्ठी करने मे लगा हूं,

सुना है दौलत शौहरत साथ नही जाती।

दौलत की ताकत पर कविता 

Shohrat-shayari

बिखरने दो होंठों पे हँसी की फुहारों को,

प्यार से बात कर लेने से दौलत कम नहीं होती।

प्यार के दो मीठे बोल से खरीद लो मुझे,

रिश्ते और दौलत पर शायरी 

दौलत दिखाई तो सारे जहां की कम पड़ेगी।

प्यार के दो मीठे बोल से खरीद लो मुझे,

दौलत दिखाई तो सारे जहां की कम पड़ेगी।

Shohrat-shayari


जो खानदानी रईस है वो अपना मिजाज नर्म रखते हैं,

जो अभी-अभी के अमीर है वो अपना तेवर गर्म रखते है।

रिशते और पैसे पर शायरी 

बेशुमार दौलत कहती है मुझसे बुढ़ापे में आकर,

इतनी मेहनत करके भी सिर्फ तन्हाई ही कमाई है।


मेरी मोहब्बत की दौलत को वो इस तरह नीलाम कर गया,

महफिल में खुद तालियां बटोरी और हमें बदनाम कर गया।

Shohrat-shayari

पिता की दौलत पर घमंड करने में क्या खुद्दारी,

मज़ा तो तब है जब दौलत तुम्हारी हो और घमंड पिता करे।


अपने अफ़साने की शोहरत उसे मंज़ूर न थी,

उस ने किरदार बदल कर मेरा क़िस्सा लिखा।

Shohrat-shayari

दोस्त को दौलत की निगाह से मत देखो,

वफा करने वाले दोस्त अक्सर गरीब हुआ करते है।

दौलत का नशा शायरी 

झोपड़ी में बसर कर ले, इमारत न बनायें।

जो दिल पर बोझ बने, वो दौलत न कमायें।।

Shohrat-shayari

दिल की उलझने रात का ख्वाब बेचकर,

क्या खूब कमाई दौलत हमने ख्वाब बेचकर।

विरासत पर शायरी 

दौलत तो विरासत में मिल सकती है,

लेकिन पहचान अपने दम पर बनानी पड़ती है।


जो दिल में घमंड रखकर बोलते है,

वही लोग इश्क़ को दौलत से तोलते है।

Shohrat-shayari

खुली न मुझ पे भी दीवानगी मेरी बरसों,

मेरे जुनून की शोहरत तिरे बयाँ से हुई।


बस मेरा ज़िक्र आते ही महफ़िल उजड़ गई,

शैताँ के बाद दूसरी शोहरत मिली मुझे।

दौलत का होना जरूरी नहीं जिंदगी में सुकून का होना जरूरी है 

शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है,

जिस डाल पे बैठे हो वो टूट भी सकती है।

Shohrat-shayari

जो देख के हँसता था हम जैसे फ़क़ीरों को,

शोहरत की बुलंदी से उतरा तो बहुत रोया।

पासा पर शायरी 

गुमनाम थे तो सब की तरफ़ देखते थे हम,

शोहरत मिली तो अपनी ख़ुदी में सिमट गए।


विरासत में दौलत और शोहरत तो मिल जाया करती है,

पर पहचान तो इंसान को खुद ही बनानी पड़ती है।


जान-पहचान बनाने से कुछ मिलता नही,

तूफ़ान कितना भी तेज हो पहाड़ हिलता नही।

Shohrat-shayari

लफ़्ज मेरी पहचान बने तो बेहतर है,

चेहरे का क्या वो तो साथ चला जाएगा।


समय-समय पर ठोकरें और धोखे मिलते रहना चाहिये,

इससे अपने और पराये की पहचान होती रहती है।

Shohrat-shayari

आप बस किरदार हैं अपनी हदें पहचानिए,

वर्ना आप भी दिन कहानी से निकाले जाएंगी।


अजनबी बने रहने में सुकून है,

ये जान पहचान जान ले लेती है।


Shohrat-shayari

किसी से ज़बर्दस्ती का, प्यार नहीं हुआ करता,

कोई भी ज़बर्दस्ती से, अपना नहीं हुआ करता,

जो दिल के करीब है सिर्फ उसको पहचानो,

कभी दिल के कालों से, रिश्ता नहीं हुआ करता।


बड़ी अजीब सी है शहरों की रौशनी,

उजालों के बावजूद चेहरे पहचानना मुश्किल है।


Shohrat-shayari

चेहरे से सिर्फ इंसान की पहचान होती है,

चेहरे से परख नहीं होती।


चीज़ों से हो रही है इंसान की पहचान,

औकात अब हमारी बाजार लिख रहे हैं।


Shohrat-shayari

कोई बोलता है तुम हिन्दू बन जाओ,

कोई बोलता है मुसलमान बन जाओ,

कुछ ऐसा कर जाओ इस जिन्दगी में कि,

हर मजहब की तुम पहचान बन जाओ।


घर से निकलो तो पता जेब में रख कर निकलो,

हादसे इंसान की पहचान तक मिटा देते है।


Shohrat-shayari

एक बेहतरीन इंसान अपनी जुबान और कर्मो से ही पहचाना जाता है,

वरना अच्छी बातें तो दीवारों पे भी लिखी होती हैं।


काम करो ऐसा कि पहचान बन जाए,

हर कदम ऐसा चलो कि निशान बन जाए,

यहाँ जिन्दगी तो सभी काट लेते है,

जिन्दगी जियो ऐसे कि मिसाल बन जाए।


Shohrat-shayari

काबिलियत तो इंसान में है इतनी,

कि जन्नत भी झुका दें,

एक बार पहचान ले खुद को,

तो पूरी दुनिया को हिला दें।


जब से हमें अपने परायों की पहचान हो गई,

तन्हा ही रहता हूँ पूरी दुनिया वीरान हो गई,

हंसी के ठहाके गूंजा करते थे जिन गलियो


Shohrat-shayari

उसे शोहरत ने तनहा कर दिया है,

समंदर है मगर प्यासा बहुत है।


यूँ बार बार निहारती हो आईना,

ख़ूबसूरती पे गुमान है या शक।


Shohrat-shayari

हर्फ़ तीखे और लहज़ा अदब का,

वाह क्या हुनर है तुम में गजब का।


फटे दुपटटे से सर ढक लिया ग़रीबी ने,

हवा में उडता है आंचल अमीरज़ादी का।

Shohrat-shayari


सोचता था मैं रह नहीं पाऊंगा तेरे बग़ैर,

देखो तुमने ये भी सिखा दिया मुझको।

घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल

किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल

कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा।

Shohrat-shayari

चल यारा मोहब्बत करने का हुनर सिखाता हूँ,

इश्क तुम शुरू करो निभाकर मैं दिखाता हूँ।


बहुत मुश्किल से करता हूँ तेरी यादों का कारोबार,

मुनाफा कम है पर गुज़ारा हो ही जाता है।


Shohrat-shayari

हर सांस सजदा करती है, हर नज़र में इबादत होती है,

वो रूह आसमानी होती है, जिस दिल में मुहब्बत होती है।


मेरी धड़कन की आवाज़ सुननी हो तो, मेरे सीने पर अपना सर रख,

वादा है मेरा ज़िन्दगी भर तेरे कानों में, मेरी मोहब्बत गूंजेगी।

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