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Mirza ghalib shayari -गालिब की शायरी-apnishayeri

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 रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायल जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है। Mirza ghalib shayari  वो आए घर में हमारे, खुदा की क़ुदरत हैं! कभी हम उनको, कभी अपने घर को देखते हैं हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तगू क्या है। Mirza ghalib poetry  हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है, वो हर इक बात पर कहना कि यूँ होता तो क्या होता ! बिजली इक कौंध गयी आँखों के आगे तो क्या, बात करते कि मैं लब तश्न-ए-तक़रीर भी था। Mirza ghalib ki shayari  यही है आज़माना तो सताना किसको कहते हैं, अदू के हो लिए जब तुम तो मेरा इम्तहां क्यों हो हमको मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन, दिल के खुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है  Mirza ghalib quotes  इश्क़ पर जोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब', कि लगाये न लगे और बुझाये न बुझे तुम न आए तो क्या सहर न हुई हाँ मगर चैन से बसर न हुई मेरा नाला सुना ज़माने ने एक तुम हो जिसे ख़बर न हुई Mirza ghalib shayari on love in hindi जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगा कुरेदते हो जो अब राख जुस्तजू क्या है Mirza g...

Shohrat par shayari, शोहरत पर शायरी -apnishayeri

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Shohrat par shayari   दौलत शोहरत आनी जानी फिर इस पर इतराना क्या पानी पर ये नाम लिखा हो ऐसा भी हो सकता है - यूनुस ग़ाज़ी अपने अफ़्साने की शोहरत उसे मंज़ूर न थी  उस ने किरदार बदल कर मेरा क़िस्सा लिक्खा  - शीन काफ़ निज़ाम Shohrat par shayari in hindi  लुटा कर प्यार की दौलत खरीदे दर्द और आंसू, मिली जो इश्क़ में हमको जरा वो जागीर तो देखो। दौलत पर शायरी  दौलत वालों को दौलत मंद कहो, अमीर वो है जो ज़मीर रखता है। बुजर्गौं की दुआएं शायरी  दुआएं इकट्ठी करने मे लगा हूं, सुना है दौलत शौहरत साथ नही जाती। दौलत की ताकत पर कविता  बिखरने दो होंठों पे हँसी की फुहारों को, प्यार से बात कर लेने से दौलत कम नहीं होती। प्यार के दो मीठे बोल से खरीद लो मुझे, रिश्ते और दौलत पर शायरी  दौलत दिखाई तो सारे जहां की कम पड़ेगी। प्यार के दो मीठे बोल से खरीद लो मुझे, दौलत दिखाई तो सारे जहां की कम पड़ेगी। जो खानदानी रईस है वो अपना मिजाज नर्म रखते हैं, जो अभी-अभी के अमीर है वो अपना तेवर गर्म रखते है। रिशते और पैसे पर शायरी  बेशुमार दौलत कहती है मुझसे बुढ़ापे में आकर, इतनी मेहनत करके भी...